कोई रिश्ता नही मगर फिर भी .......एक तस्वीर लाजमी सी है......
आँखों की नदी ..बाहों की पतवार ..जिंदगी का समन्दर.. ना जाने कितने .भंवर कितने बवंडर ..तुम्हारी चौडी छाती पर टिकी मेरी परेशानियाँ ....
प्यार बंद डब्बे में कपूर सा ...जतन ना करो तो ना जाने कौन सी दिशा में उड़ जाए..बादल बन जाए...हम भींगते हुए भी सूखते रहे ..की पछताती आँखों में एक ग्लानी तैर जाए..ऐसा क्यों किया ??
सुनो आज रात अजीब ख़ामोशी फैली है ना चारो ओर..जरा मेरी पुरानी डायरी देना ....तुम कितने पास ...समय की टिकटिक ..बेफिक्र हवा..पुराने पन्नों से कुछ मीठे वक़्त चुराते हैं..पुरानी कविता पढ़ कर मुस्करा लेते हैं चलो..अच्छा वो आखिरी पन्नों पर तुमने क्या लिखा काटा था..आज तक नही बताया...मेरे उलझते बालों में सुलझती अंगुलियाँ ...
एक छत अतीत हो गई..एक प्यार याद भर..एक डायरी .जिससे होती हुई गुजर जाती हूँ .
.रात बड़ी हो रही ..हर करवट एक सपना बदल जाता है ..पुरानी सूखी पंखुरी का झर झर जाना ...तुम छुईमुई हो..आखिरी पन्ने की मुस्कराहट ...भूला हुआ गाना ...
शाम से आँख में नमी सी है ..आज फिर आपकी कमी सी है........एकांत के बोल ....कभी सुन भी लो ....
आँखों की नदी ..बाहों की पतवार ..जिंदगी का समन्दर.. ना जाने कितने .भंवर कितने बवंडर ..तुम्हारी चौडी छाती पर टिकी मेरी परेशानियाँ ....
प्यार बंद डब्बे में कपूर सा ...जतन ना करो तो ना जाने कौन सी दिशा में उड़ जाए..बादल बन जाए...हम भींगते हुए भी सूखते रहे ..की पछताती आँखों में एक ग्लानी तैर जाए..ऐसा क्यों किया ??
सुनो आज रात अजीब ख़ामोशी फैली है ना चारो ओर..जरा मेरी पुरानी डायरी देना ....तुम कितने पास ...समय की टिकटिक ..बेफिक्र हवा..पुराने पन्नों से कुछ मीठे वक़्त चुराते हैं..पुरानी कविता पढ़ कर मुस्करा लेते हैं चलो..अच्छा वो आखिरी पन्नों पर तुमने क्या लिखा काटा था..आज तक नही बताया...मेरे उलझते बालों में सुलझती अंगुलियाँ ...
एक छत अतीत हो गई..एक प्यार याद भर..एक डायरी .जिससे होती हुई गुजर जाती हूँ .
.रात बड़ी हो रही ..हर करवट एक सपना बदल जाता है ..पुरानी सूखी पंखुरी का झर झर जाना ...तुम छुईमुई हो..आखिरी पन्ने की मुस्कराहट ...भूला हुआ गाना ...
शाम से आँख में नमी सी है ..आज फिर आपकी कमी सी है........एकांत के बोल ....कभी सुन भी लो ....
आज फिर आपकी कमी सी है........एकांत के बोल ....कभी सुन भी लो ....
ReplyDeletesahi kaha G..:-))